अपना 100% देने वाले हमेशा क्यों पछताते हैं? इस कहानी को मिस मत करना!

                                     बिल्ली की समझदारी और 'ओवर-कॉम्पिटेंस ट्रैप

                                            




  एक शहर में एक बेहद कंजूस व्यापारी रहता था। एक बार उसके अनाज के गोदाम में चूहों का आतंक मच गया। चूहों ने उसका भारी नुकसान करना शुरू कर दिया। परेशान होकर कंजूस व्यापारी एक सफेद बिल्ली खरीद लाया और उसे गोदाम में छोड़ दिया। बिल्ली बेहद फुर्तीली और काम के प्रति ईमानदार थी। उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और मात्र चार-पांच दिनों में ही गोदाम के सारे चूहों का सफाया कर दिया। व्यापारी ने जब देखा कि गोदाम अब पूरी तरह चूहों से मुक्त हो चुका है, तो उसके मन का लालच जाग उठा। उसने सोचा— "अब जब चूहे खत्म ही हो चुके हैं, तो इस बिल्ली के दूध-रोटी पर फालतू खर्चा क्यों करना?" उसने तुरंत उस वफादार बिल्ली को घर से बाहर खदेड़ दिया। पासा पलट गया... कुछ ही हफ्ते बीते थे कि आस-पास के चूहे फिर से उस गोदाम में जमा हो गए। नुकसान पहले से भी ज्यादा होने लगा। व्यापारी को अपनी गलती का अहसास हुआ, लेकिन वह बिल्ली तो जा चुकी थी। इस बार वह बाजार से एक दूसरी बिल्ली लेकर आया। यह बिल्ली बहुत 'सयानी' और दुनियादार थी। उसने आते ही माहौल को भांप लिया। उसने चूहों का शिकार तो किया, लेकिन जानबूझकर कुछ चूहों को हमेशा जिंदा छोड़ देती थी। नतीजा यह हुआ कि गोदाम में थोड़े-बहुत चूहे हमेशा बने रहते और बिल्ली की उपयोगिता कभी खत्म नहीं होती। अब व्यापारी चाहकर भी उस बिल्ली को नहीं निकाल सकता था, क्योंकि वह पूरी तरह उस पर निर्भर हो चुका था। बिल्ली को उम्रभर के लिए मुफ़्त का खाना और ठिकाना दोनों मिल गया। लाइफ लेसन: क्या है 'ओवर-कॉम्पिटेंस ट्रैप'? मनोविज्ञान (Psychology) में इसे 'ओवर-कॉम्पिटेंस ट्रैप' (Over-Competence Trap) कहा जाता है। यह कहानी आज के कॉर्पोरेट लाइफ और हमारे निजी रिश्तों पर सटीक बैठती है: • अपना महत्त्व बनाए रखें: कार्यक्षेत्र (Job) या बिजनेस में अपना सारा काम एक ही बार में पूरी तरह खत्म कर देने का मतलब है—मैनेजमेंट की नजरों में अपनी उपयोगिता (Urgency) को खत्म कर देना। • 100% देने का नुकसान: जब आप हर रोज किसी के लिए अपना 100 प्रतिशत दांव पर लगा देते हैं, तो दो ही चीजें होती हैं—या तो सामने वाले की अपेक्षाएं (Expectations) इतनी बढ़ जाती हैं कि आपकी मेहनत 'नॉर्मल' लगने लगती है, या फिर उन्हें आपकी जरूरत ही महसूस नहीं होती। • अति हर चीज की बुरी है: आवश्यकता से अधिक प्यार, परवाह या समर्पण अक्सर लोग हजम नहीं कर पाते और उसे 'ग्रांटेड' (Granted) लेने लगते हैं। याद रखें: किसी को भी अपना 'सब कुछ' एक बार में मत सौंपिए—फिर चाहे वह आपका तन हो, मन हो, धन हो, या आपका श्रम (Hard work) हो। थोड़ा सा सस्पेंस और थोड़ी सी कमी, आपके वजूद और आपकी वैल्यू को हमेशा बनाए रखती है।

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