एक संतुष्ट हृदय का रहस्य

 मनमोहन नाम के एक वृद्ध व्यक्ति नदी के किनारे बैठे सूर्यास्त देख रहे थे। एक युवा यात्री उनके पास आया और पूछा, "श्रीमानआप बहुत शांत दिख रहे हैं। ऐसा जीने का क्या रहस्य है कि अंत में कोई पछतावा (sorry) न रहे?"

मनमोहन मुस्कुराए और ज़मीन से तीन चीज़ें उठाईं: एक पत्थरएक बीज और एक छोटा फूल।

उन्होंने कहा, "जीवन इन तीनों की तरह है। अधिकांश लोग अपना पूरा जीवन पत्थर को चमकाने में बिता देते हैं—उनका धनपद और मकान। लेकिन अंत मेंपत्थर ठंडा और भारी होता है। यह आपके साथ नहीं जा सकता।"

"अंतिम दिनों में 'सॉरीसे बचने के लिएतुम्हें बीज बोना चाहिए। बीज का अर्थ है दया और रिश्ते। जब आप दूसरों की मदद करते हैं और गहराई से प्रेम करते हैंतो आप ऐसे पेड़ लगाते हैं जो आपके बूढ़े होने पर आपको छाया देंगे।"

"और फूल?" यात्री ने पूछा।

"फूल वर्तमान क्षण है," मनमोहन ने उत्तर दिया। "यदि तुम आज इसकी सुगंध लेने के लिए नहीं रुकोगेतो यह मुरझा जाएगा। अधिकांश लोग इसलिए दुखी होते हैं क्योंकि वे 'कलमें जीते रहे और 'आजमें सांस लेना भूल गए। क्षमाकृतज्ञता और प्रेम—यही जीवन की असली ज़रूरतें हैं।"

 जीवन के अनिवार्य तत्व:

Ø रिश्ते दौलत से बढ़कर: चीज़ों में नहींलोगों में निवेश करें।

Ø वर्तमान की शक्ति: खुश होने के लिए किसी "सही" समय का इंतज़ार न करें।

Ø माफ़ी: मन में बैर पालनाएक भारी पत्थर उठाने जैसा है। इसे जाने दें।

Ø उद्देश्य: कुछ ऐसा करें जिससे किसी और की मदद हो सके।

Post a Comment

0 Comments